Ganne ki kheti hindi mein

गन्ने के लिए खेत की तैयारी तथा भूमि का चुनाव

गन्ने की खेती करने के लिए उचित जल निकास वाली दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है गर्म जलवायु गन्ने की फसल के लिए अच्छा होता है गन्ने की खेती करने के लिए मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करके छोड़ देनी चाहिए 1 सप्ताह बाद कल्टीवेटर से पाटा लगा कर दो - तीन जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी तथा खेत को समतल बना लेना चाहिए खेत की अंतिम जुताई करते समय 25 कुंतल प्रति एकड़ गोबर की सड़ी खाद खेत में मिला देना चाहिए !
Ganne ki kheti hindi mein
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खाद तथा उर्वरक

खेती की अंतिम जुताई के समय 120 kg यूरिया, 80 किलो फास्फोरस तथा 80 किलो पोटाश खेत में मिला देना चाहिए यूरिया को तीन बार में आधी मात्रा खेत की तैयारी करते समय तथा शेष 2 भाग बुआई के 30 दिन बाद तथा 60 दिन बाद के रूप में करना चाहिए !

गन्ने की बुआई का समय

शरद ऋतु में गन्ने की बुवाई अक्टूबर और नवंबर के महीने में तथा बसंत ऋतु ने गन्ने की बुवाई फरवरी और मार्च के महीने में किया जाता है गांव के कुछ किसान गन्ने की फसल की बुवाई आलू की बुआई करने के बाद आलू के कुडों में कर देते हैं जिससे की खुदाई करते समय गन्ने की फसल में अंकुरण हो चुका होता है और समय का भी बचत होता है !

 उन्नत प्रजाति

को सी 671,को 7314,को 86032,को 6304,को 6217,को जे 2087,को 775,को 7318,को 87010,को जवाहर 94-141 बहुत सी उन्नतशील प्रजातियां होती है !

बुआई

गन्ने की बुवाई फावड़े या देशी हल की सहायता से कुडों में की जाती है गन्ने को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ध्यान रहे कि गन्ने के एक टुकड़े में 2 से 3 आंखें होनी चाहिए 80 से 90 सेंटीमीटर की दूरी पर कुडों से कुडों की दूरी रहनी चाहिए तथा 20 से 30 सेंटीमीटर गहराई में बुआई करनी चाहिए कुडों में बुवाई करते समय दीमक के प्रकोप से बचने के लिए कुडों में रीजेंट गिरा देना चाहिए इससे दीमक लगने की संभावना बहुत कम हो जाती है गन्ने की बुवाई करते समय सिरे से सिरे की दूरी 5 सेंटीमीटर रखना चाहिए !

बीजोपचार


गन्ने की बुवाई करने से पहले छोटे-छोटे टुकड़ों को किसी बड़े बर्तन में बाविस्टीन 1 ग्राम प्रति लीटर या daithen M45 2 ग्राम प्रति लीटर का घोल बनाकर 20 से 25 मिनट तक डुबो देना चाहिए इसके बाद छाया में सुखाकर कुडों में बुआई करने के बाद मिट्टी से ढक देना चाहिए !

खरपतवार नियंत्रण

फसल में खरपतवार नियंत्रण से निजात पाने के लिए 2,4 डी सोडियम साल्ट प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें या कुदाल की सहायता से गुड़ाई करके भी खरपतवार को निकाला जा सकता है !

सिचाई तथा बंधाई

समय-समय पर गन्ने की सिंचाई करते रहना चाहिए गर्मियों में गन्ने में अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है ध्यान रहे कि कल्ले निकलते समय खेत में नमी का होना अति आवश्यक है इसके साथ-साथ बरसात के मौसम में अधिक नमी वह हवा बहने के कारण फसल गिरने की संभावना होती है इसलिए बरसात होने से पहले बंधाई करना बहुत जरूरी है हो सके तो फसल को दो बार में बंधना चाहिए !
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