baigan ki kheti hindi mein

बैगन के गुण

बैंगन की खेती के लिए गर्म जलवायु उपयुक्त मानी जाती है बैगन की खेती पर्वतीय इलाकों को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों में किया जाता है बैगन एक पौष्टिक सब्जी है बैगन में लोहा कैल्शियम तथा फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है बैगन की खेती करके अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है भारत और चीन में बैगन की खेती बहुत अधिक मात्रा में की जाती है !

baigan ki kheti hindi mein
baigan ki kheti hindi mein 

बैगन की किस्में
वैसे तो बैगन की बहुत सी किसमें होती हैं लेकिन हम यहां पर आपको अच्छी किस्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे अधिक से अधिक पैदावार ली जा सकती है !

1- पूसा क्रांतिपूसा हाइब्रिड 5, पूसा हाइब्रिड 6, पूसा हाइब्रिड यह सब बैगन की बहुत पुरानी कितनी है जो गांव के किसानों को आसानी से नहीं मिल पाती है इसलिए हम आपको कुछ और पर जातियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको आसानी से मिल जा सकती है और गांव के किसान लगभग यही प्रजाति का उपयोग ज्यादा करते हैं
2- इंडो अमेरिकननामधारीयह दो किस्मों का प्रयोग गांव के किसान बहुत अधिक मात्रा में करते हैं जो किसानों को आसानी से मिल जाती है !
बैगन की खेती के लिए नर्सरी तैयार करना 

बैगन की खेती के लिए नर्सरी तैयार करन बैगन की नर्सरी डालने के लिए 3 मीटर लंबा और डेढ़ मीटर चौड़ा तथा 15 सेंटीमीटर ऊंची ऊंची हुई 3 - 4 क्यारियां अपनी आवश्यकता अनुसार बना लेनी चाहिए क्यारी बनाने के बाद अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद बिखेर कर गुड़ाई कर देनी चाहिए उसके बाद क्यारी को समतल बना लेना चाहिए क्यारी तैयार होने के बाद बीज से बीज की दूरी 2 सेंटीमीटर तथा लाइन से लाइन की दूरी 7 सेंटीमीटर और दशमलव 5 सेंटीमीटर की गहराई में बीजों की बुवाई करनी चाहिए बीज की बुआई करने के बाद उसे पुआल से ढक देना चाहिए और नमी की कमी होने पर हजारे की सहायता से पानी का छिड़काव करना चाहिए जिससे कि अंकुरण ठीक तरह से हो सके बुआई के लगभग 25 से 30 दिन के बाद पौधे रोपाई के लायक हो जाते हैं !

बैगन की खेती में उर्वरकों का प्रयोग

बैगन की खेती में उर्वरकों का बहुत महत्व होता है खेत तैयार करते समय 20 से 25 टन खेत में अच्छी 
सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाकर जुताई कर देनी चाहिए और पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए इसके अलावा 200 किलो नाइट्रोजन 150 किलोग्राम फास्फोरस और 150 किलोग्राम का उपयोग करना चाहिए यूरिया का उपयोग बार में करना चाहिए यूरिया की आधी मात्रा जूताई के समय तथा शेष बची हुई मात्रा को दो बार में पौधा की रोपाई करने के बाद 25 दिन में तथा शेष बची हुई मात्रा पौध रोपाई के 35 दिन बाद उपयोग करना चाहिए !

रोपाई का समय 


बैंगन की फसल में रोपाई का बहुत खास ध्यान रखा जाता है शरद ऋतु में बैगन की रोपाई करने के लिए मई या जून के महीने में नर्सरी की बुवाई करते हैं ! जो जुलाई महीने में रोपाई करने के लायक तैयार हो जाते हैं वसंत ऋतु में बैगन की रोपाई करने के लिए नवंबर के महीने में बीज की बुआई किये जाते हैं जो जनवरी महीने में रोपाई करने के लायक तैयार हो जाते हैं बरसात के में बैगन की रोपाई करने के लिए मार्च के महीने में बीज की बुआई किये जाते हैं जो अप्रैल महीने में रोपाई करने के लायक तैयार हो जाते हैं !

बैगन की रोपाई 

बैगन की पौधे से अधिक पैदावार लेने के लिए दुरी का बहुत महत्व होता है बैगन की रोपाई करने के लिए पौधे से पौधे की दुरी 45 से 50 सेंटीमीटर तथा लाइन से लाइन की दुरी 90 से 100 सेंटीमीटर रखना चाहिए !

बैगन की खेती में लगने वाले रोग तथा उपाय

1-झुलसा धब्बा रोग 

यह रोग लगने से पौधे की पत्तियों में काले भूरे रंग के धब्बे बनने लगते है इसकी रोकथाम के लिए daithen M 45 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या बाविस्टीन 15 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी या साफ़ 20 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में 15 दिन के अन्तराल पर प्रयोग करना चाहिए !

2-रस चुसक किट
ये पौधे की पत्तियों के निचले भाग में बैठकर रसों को चूसती है जिससे पत्तियां पिली पड़ जाती है और गिर जाती है इसकी रोकथाम के लिए 10 ग्राम कार्टेपहायड्राक्लोराइड, 20 ग्राम acitamiprid, प्रति 15 लीटर पानी में एक साथ मिलाकर छिड़काव करने से सभी प्रकार के चुसक कीटों से नियंत्रण पाया जा सकता है !
3- तना और फल छेदक 

ये पौधे की शीर्ष भाग में और फलों में छेड़ कर देती है जिससे जिससे उपज में बहुत कमी हो जाती है इसकी रोकथाम के लिए 25 ml प्रति 15 लीटर पानी में बायोak57 या जम्बा 5 ml प्रति 15 लीटर पानी में या कोराजीन 5 ml प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से सभी प्रकार के फल और तना छेदक कीटों से नियंत्रण पाया जा सकता है !

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