Cotton (kapas) ki kheti ki jankari hindi mein

कपास की खेती के लिए भूमि का प्रकार तथा खेती की तैयारी 

वैसे तो कपास की खेती के लिए सभी प्रकार की भूमि उपयुक्त मणि जाती है लेकिन बलुई दोमट मिटटी हो तो अच्छा मन जाता है ! कपास की खेती के लिए 2 से 3 गहरीं जुताई कर के पाटा चला देना चाहिए जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाये और खेत को समतल बना लेना चाहिए !
Cotton (kapas) ki kheti ki jankari hindi mein
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कपास की खेती के लिए उन्नतशील पजाति

1- देशी प्रजाति - सी.ए.डी. 4,लोहित,आर.जी. 8 !
2- अमेरिकन प्रजाति - आर.एस.२०१३,एच्.एस.6,एफ.846,आर.एस.810 !

कपास की खेती के लिए बीज बुआई का समय 

वैसे तो कपास की बुआई प्रजाति पर निर्भर करती है लेकिन कपास के बीज की बुआई जब बारिश शुरू हो जाये जुलाई के महीने में की जाती है अमेरिकन प्रजाति की बुआई गर्मियों में भी की जाती है !

कपास की खेती में पौध रोपण की क्रिया 

कपास के पौधों की बुआई पौधे से पौधे की दुरी 30 से 35 सेंटीमीटर तथा लाइन से लाइन की दुरी 70 से 75 सेंटीमीटर होतीं है ध्यान रहे की एक जगह 3 से 5 बीज होना चाहिए 

कपास की खेती के लिए उर्वरकों का प्रयोग 

कपास की खेती में 60 kg NITROPJAN ,40 kg पोटाश तथा गोबर की खाद की आवश्यकता होती है ! खेती की अंतिम जुताई करते समय पोटाश की पूरी मात्रा तथा नित्रोजन की आधी मात्रा और गोबर की खाद मिला देना चाहिए NITROJAN की बची मात्रा को पौधे में फूल आने के समय दो बार में करना चाहिए !

कपास की खेती में लगने वाले प्रमुख रोग और रोकथाम 

(1) झुलसा रोग - यह रोग लगने से पौधे की पत्तियों में धब्बा बनने लगता है जिससे पत्तियां झुलस जाती है इसकी रोकथाम के लिए daithen M 45 2ग्राम प्रति लीटर,या साफ 20 ग्राम प्रति 15 लीटर ,या kaparoxicloraid 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में प्रयोग करना चाहिए !
(2) रस चुसक किट और फली बेधक कीड़े  - ये पौधे की पत्तियों के रस को चूस लेते है जिससे पत्तियां कमजोर हो जाती है जिसके कारण पौधे का विकास ठीक से नहीं हो पता है इसकी रोकथाम के लिए acitamiprid 20%sp 20 ग्राम प्रति लीटर पानी या kartop 15 ग्राम प्रति लीटर पानी और फली बेधक किट फलों में छेड़ कर देते है इसकी रोकथाम के लिए जम्बा 5 ml प्रति 15 लीटर पानी में प्रयोग करना चाहिए !
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