Garmiyon mein khira (Cucumber) ki unnat kheti hindi mein

गर्मियों में खीरा की खेती की जानकारी

खीरा एक ऐसी सब्जी है जिसका पूरे विश्व में बहुत बड़ा महत्व है खीरा का उपयोग सलाद बनाने में बहुत ज्यादा किया जाता है खीरा गर्मियों में सबसे ज्यादा खाने वाली जाने वाली सब्जी है गर्मियों में खाना खाने के बाद खीरा खाने से पाचन क्रिया बहुत अच्छा होता है इसलिए गर्मियों में खीरा सबसे ज्यादा खाए जाने वाली सब्जी है गर्मियों में खीरा की खेती करके बहुत अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है !
Garmiyon mein khira (Cucumber) ki unnat kheti hindi mein
Garmiyon mein khira (Cucumber) ki unnat kheti hindi mein

खेत की तैयारी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के किसान गर्मियों में खीरा की खेती करके बहुत अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं यहां के किसान खीरा की खेती करने के लिए धान की कटाई के बाद खेत को पलेवा करके छोड़ देते हैं और खेत पक जाने के बाद गहरी जुताई करके छोड़ देते हैं जनवरी के महीने में बुआई करने से पहले खेत को कल्टीवेटर से पाटा लगाकर 2 जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बना लेते हैं और इसके बाद 10 जनवरी से 1 फरवरी के पहले बीजों की बुवाई कर देते हैं !

उन्नतशील किश्मे

ऐसे तो खीरा की बहुत सारी किश्मे होती है लेकिन यहाँ के किसान सेमिनिस (मालिनी)के बीज का उपयोग बहुत अधिक मात्रा में करते है यह प्रजाति बहुत अधिक उपज देती है !

खीरा लगाने की विधि

पूरी तरह खेत तैयार होने के बाद 1.5 मीटर की दूरी के अंतराल पर नालियां बना लेनी चाहिए नालियां बना लेने के बाद नालियों में पानी भर देना चाहिए देनी चाहिए जिससे मिट्टी में नमी आ जाए और सुबह 7 इंच की दूरी पर बीज की बुवाई करना चाहिए नमी की कमी होने पर बीज अंकुरण के समय हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए जिससे बीजों का जमाव ठीक तरह से हो सके

उर्वरकों का प्रयोग 

पौधों में 5 से 6 पत्तियां आने के बाद कुदाल की सहायता से नालियों की गुड़ाई कर देना चाहिए और मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए यह क्रिया करने के बाद 4 से 5 दिन तक छोड़ देना चाहिए और उसके बाद प्रति नाली 1 kg फास्फोरस,250 ग्राम पोटाश,250 ग्राम यूरिया देने के बाद फावड़े की सहायता से मिट्टी देना चाहिए और नालियों में पानी भर देना चाहिए और समय -समय पर खरपतवार निकलते रहना चाहिए फिर 35 दिन के बाद पुनः इसी मात्रा में उर्वरक का प्रयोग कर देना चाहिए !

सिचाई 

खीरा की खेती में  गर्मियों के मौसम में सिंचाई केवल नालियों में 2 से 3 दिन के अंदर करना चाहिए गर्मियों में खीरे की फसल में बहुत अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है इसलिए ध्यान रहे कि आसपास सिंचाई का साधन होना बहुत जरूरी है !

रोग तथा नियंत्रण

लाल कीड़ा - यह कीड़ा पौधों में दो-तीन पत्तियां आने पर लगना प्रारंभ हो जाता है यह पौधों की पत्तियों को कुतर देते हैं इसके अलावा फूलों को भी खा जाते हैं के रोकथाम के लिए काबरेल 1.5 ml प्रति लीटर या रोगार 1.5 ml प्रति लीटर पानी में उपयोग करना चाहिए !
विषाणु जनित रोग - यह रोग पौधों की पत्तियों से शुरू होता है यह रोग लगने से पत्तियों पर पीले धब्बेनुमा निशान बन जाते है और पत्तियों में गुरचापन आने लगता है और इसका असर फलों पर भी होता है फल छोटे तथा टेढ़े बिना साइज़ के होने लगते है इसकी रोकथाम के लिए imidacloprid 1.5 ml या कानफिडोर 1.5 ml प्रति लीटर पानी में उपयोग करना चाहिए !
फल छेदक - यह कीड़े फुल आते समय फल बनने की स्थिति में लगते है इसकी रोकथाम के लिए जम्बा 5 ml प्रति 5 लीटर पानी में छिड़काव करने से नियंत्रण पाया जा सकता है !
झुलसा धब्बा रोग - पौधों में किसी प्रकार का दाग धब्बा दिखाने पर daithen M 45 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए !

तुड़ाई


फल तैयार होने के बाद खराब फली को छांटकर अच्छे फल मंडियों में ले जाकर बेच देना चाहिए ध्यान रहे कि खीरा की तुड़ाई हर तीसरे दिन करनी चाहिए !
Previous
Next Post »