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गर्मियों में गेंदा फुल की खेती करने की जानकारी 

गेंदा फूल की भूमिका 

हमारे भारत में गेंदा फूल का ब्यवसाय बहुत महत्वपूर्ण होता जा रहा है क्योकि इसका उपयोग किसी भी धार्मिक कार्यों में बहुत उपयोग होता है !बाजार में अब गेंदा फूल की मांग वर्ष भर होती है हमारे देश में अब गेंदा फूल की खेती बहुत जोरो से हो रही है !
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गेंदा फूल का उपयोग 

इसका उपयोग शादी-ब्याह,बर्थडे,पूजा,स्टेज,मंडप,अन्य प्रकार के सरकारी समारोह,गाड़ी सजाने बहुत जगहों पर किया जाता है !

गेंदा फूल की खेती के लिए भूमि और जलवायु का चयन 

वैसे तो हमारे भारत में इसकी खेती सभी प्रकार के भूमि और जलवायु में की जाती है लेकी अच्छी उपज लेने के लिए गेंदा फूल की खेती के लिए मटियार दोमट मिटटी,बलुई दोमट मिटटी,तथा उचित जल निकास वाली जमीन अच्छी मणि जाती है !हमारे भारत के उत्तरी मदनी छेत्रों में इसकी खेती शरद ऋतू में की जाती है और पर्वतीय छेत्रों में इसकी खेती गर्मी के मौसम में की जाती है ! हमारे भारत के उत्तर पदेश राज्य में इसकी खेती तीनो मौसम में बहुत अच्छी की जाती है !

गेंदा फूल की के लिए बीजों का चयन 

हमारे भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के किसान बीजों का निर्माण खुद करते है यहाँ के किसान फूलो की खेती करने में बहुत आगे निकल चुके है यहाँ के किसान गर्मियों की गेंदे की फूल की बिज बनाने के लिए जून के महीने में जब बारिश शुरू हो जाती है तो उसके खेत में जो कुल सबसे अच्छी होती है उसकी शाखाओं को काटकर लगभग 100 शाखा जमीन में गाड़ देते है और उसमे जड़ आने के बाद (लगभग 25 दिन बाद ) उसे अपने खेत में 2 फिट की दुरी पर लगा देते है और जब उसमें जब उसमें फूल आते है तो नवम्बर के माहिने में फ्हुलों को पूरी तरह खिल जाने के बाद उसे तोड़कर उसकी पंखुड़ियों को काटकर फेंक देते है और उसकी निचे वाली भाग को नेर कर धुप में सुखा लेते है और दिसम्बर महीने में उसकी नर्सरी डाल देते है !

गेंदा फूल की प्रजातियाँ

वैसे तो गेंदे की बहुत सी प्रजातियाँ होती है लेकिन सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फुल लाल नारंगी और पिला बसंती दो तरह के फूल की खेती गर्मियों के मौसम में बहुत अधिक मात्रा में होती है !जिसे लोकल किसान लाल और पिला के नाम से जानते है !

गेंदा फूल की नर्सरी डालने की विधि 

15 नवम्बर के बाद गर्मी वाले गेंदे की फूल की नर्सरी डाल देनी चाहिए,इसके लिए 1.5 मीटर चौड़ा तथा 3 मीटर लम्बा उठी हुई क्यारी बना लें और गोबर की खाद और २०० ग्राम यूरिया, २०० ग्राम पोटाश, २०० ग्राम, फास्फोरस मिलकर गुड़ाई कर देनी चाहिए उसके बाद बिज से बिज की दुरी 1.5 सेंटीमीटर तथा लाइन से लाइन की दुरी 5 सेंटीमीटर और 0.5 गहरी उसकी बुआई करते है 

खेत की तैयारी तथा उर्वरक 

वैज्ञानिकों द्वारा दर्शाया गया 10 टन गोबर की खाद,120 kg यूरिया,६० kg पोटाश,60 kg फास्फोरस,प्रति एकड़ पर्याप्त है लेकिन आज के किसान अपना technikal अपनाते है वो लोग रोपाई से पहले खेत की जुताई करने के बाद उर्वरकों का पर्योग का प्रयोग करते है जबकि वैज्ञानिक उसके पहले कहते है !

गेंदा फूल की पौधे की रोपाई 

अच्छी तरह खेत तैयार करने के बाद स्वस्थ पौधे की रोपाई की जाती है ! जब पौधे 30 से 35 दिन के हो जाय तब इसे मुख्य खेत में रोपाई कर देनी चाहिए !गर्मियों में उगाई जाने वाले गेंदे के पौधे को लगाने के लिए दुरी का बहुत महत्व होता है !
पौधे से पौधे की दुरी 45 से 50 सेंटीमीटर तथा लाइन से लाइन की दुरी 60 से 65 सेंटीमीटर रखनी चाहिए !

गेंदा फूल की पौधों में समसामयिक कार्य

पौधे की रोपाई के बाद जब पौधे 20 से 25 दिन के हो जाय तो पौधे की शीर्ष शाखा को 1 सेंटीमीटर निचे तक तोड़ देना चाहिए जिससे अधिक से अधिक शाखाएं आती है और उपज बढ़ जाती है 30 से 35 दिन होने पर उसमे मिटटी चढ़ा देनी चाहिए! समय समय पर खरपतवार निकलते रहना चाहिए ! 7 से ९ दिन के अन्तराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए !

गेंदा फूल की पौधों में लगने वाले रोग और उसका नियंत्रण 

गेंदे की पौधे में मुख्य रूप से चार प्रकार के रोग लगते हैं 
(1) हरा और सफ़ेद फुदका - ये पौधे की पत्तियों का रस चुसती है इसकी नियंत्रण के लिए acitamiprid 20%sp या cartop 1 ग्रम प्रति लीटर पानी में उपयोग करना चाहिए !
(2) लाल मकड़ी -  ये पौधे की पत्तियों में झाला नुमा बना देती है इसकी नियंत्रण के लिए कोसावेट 1.5 ग्रम प्रति लीटर ओमाईट २ml प्रति लीटर पानी में का उपयोग करना चाहिए !
(3) तम्बाकू की इल्ली - ये दिन में जमीन में मिटटी के निचे रहती है और रात में निकलकर कलि और फूलों को खा जाती है इसकी नियंत्रण के लिए जम्बा 5 ml प्रति 15 लीटर पानी या बायो ak 57 1.5 ml प्रति लीटर पानी में उपयोग करना चाहिए ! 
(4) धब्बा,झुलसा,आर्द्र गलन रोग - ये रोग लगने से पौधे उकाठने लगते हैं और फूलों पत्तियों में दाग धब्बे हो हजे है इसकी नियंत्रण के लिए अमिस्तार 15 ml प्रति 15 लीटर या daithen m 45 2 ग्राम प्रति लीटर या hymil 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में उपयोग करना चाहिए ! 

फूलों की तुड़ाई की पौधों 

जब फूल पूरी तरह खिल जाये तो फूलों की तुड़ाई करके उसकी माला (गजरा ) बनाकर या पैकिंग कर के मंदी तक ले जा सकते है ! फूलों की तुड़ाई करने के बाद उसे छायादार जगह में रखना चाहिए और कपड़े भिगोकर उसे ढक देना चाहिए !

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