Karela ki kheti ki jankari hindi mein

करेला की खेती 

करेला की खेती हमारे भारत के लगभग सभी राज्यों में किया जाता है यह जायद तथा खरीफ दोनों मौसम में उगाया जाता है इसकी खेती के लिए गर्म एवं आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है कुछ लोग करेले का उपयोग सब्जी बनाने तथा इसका रस निकालकर पिने के प्रयोग में लेते हैं शुगर की बीमारी,कफ,मधुमेह रोगों के लिए करेला बहुत असरदार सिद्ध हुआ है !
Karela ki kheti ki jankari hindi mein
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जलवायु और भूमि

करेला की खेती सभी प्रकार की भूमि जिनका ph मान 6.0 से 7.0 हो बहुत अच्छा होता है इसकी खेती गर्म एवं आर्द्र दोनों मौसम में किया जाता है करेले की खेती के लिए 20 से 35 डिग्री तापमान अच्छा होता है !

करेला की उन्नत प्रजातियाँ

पूसा संकर 1,पूसा विशेष,अर्का हरित,सी 16,फैजाबादी बारह मासी,प्रिया,प्राची बहुत तरह के बीज बाजार में उपलब्ध है लेकिन अच्छी उपज एवं गुणवत्ता के लिए अपने क्षेत्र में चुने गए बीजो का प्रयोग कैअना चाहिए !

भूमि की तैयारी तथा उर्वरक का प्रयोग

करेले की खेती करने के लिए बुआई के पहले पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद कुछ दिन तक छोड़ देना चाहिए जिससे हानिकारक किट चिड़ियों द्वारा नस्ट हो जाएँ और इसके बाद 2-3 जुताई कल्टीवेटर से करके हर जुताई पर पाटा लगा देना चाहिए जिससे मिटटी भुरभुरी हो जाए पूरी तरह से तैयार होने के बाद 200 से 250 कुंटल सड़ी हुई देसी गोबर की खाद तथा 50 किलो पोटाश ,50 किलो फास्फोरस 60 किलो यूरिया भूमि में मिलाना चाहिए दो बार में आधी की मात्रा खेत की तैयारी करते समय शेस बची हुई मात्रा को दो बार में बुआई के 20 दिन 55 दिन के अंतराल पर नालियों में करना चाहिए !

बीजोपचार

बुआई के पहले बीजों का उपचार करना बहुत जरूरी है बीजोपचार करने से पौधे स्वस्थ रहते हैं इसके लिए 2 ग्राम बावीस्टीन 1 kg बीज के लिए पर्याप्त होता है !

बीज की बुआई तथा समय 

करेले की बीज की बुआई करने से पहले बीज को 24 से 30 घंटे तक पानी में भिंगों देना चाहिए यह क्रिया करने से अंकुरण और जमाव बहुत अच्छा होता है ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली करेले की फसल जनवरी तथा फरवरी के महीने में और वर्षा ऋतु में बोई जाने वाली फसल जुलाई महीने में की जाती है करेले की बीज की बुवाई पौधारोपण करके तथा सीधे बीज द्वारा नालियों पर किया जाता है !

सिचाई तथा खरपतवार नियंत्रण

करेले की फसल में सिंचाई गर्मियों के मौसम में 4 से 6 दिन के अंतराल पर तथा वर्षा ऋतु में बारिश ना होने पर अपनी आवश्यकता अनुसार करना चाहिए इसके साथ-साथ समय-समय पर अपने खेत को खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए खरपतवार अधिक होने पर पौधों को नुकसान होता है तथा कीड़े-मकोड़े लगने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए अपने खेत में समय-समय पर निगरानी करते रहना चाहिए ध्यान रहे की बरसात के मौसन में करेले के फल जमीन पर लगने से सड़ जाते हैं इस अवस्था में फसल को मचान बनाकर चढ़ा देना चाहिए !

लगने वाले रोग तथा नियंत्रण


करेले की फसल में 3 से 4 पत्तियां आने पर लाल किट लगने लगते है यह पत्तियों को खाते हैं और पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं इसकी रोकथाम के लिए ro पुकार रोगार 1.2 ml प्रति लीटर पानी में उपयोग करना चाहिए और जब फसल में फल लगने लगते हैं उस स्थिति में फल छेदक कीड़े लगने लगते हैं इसकी रोकथाम के लिए बायो ak 57 या जब्बा इतना का प्रयोग करना चाहिए और पतियों पर धब्बा बनने की स्थिति में daithen M 45 2 ग्राम प्रति लीटर का उपयोग करना चाहिए !
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