makka ki kheti ki jankari in hindi (makka ki vaigyanik kheti)

मक्का की खेती के लिए भमि एवं जलवायु का चयन 

मक्का की खेती लगभग सभी तरह की भूमि में किया जा सकता है इसकी खेती से अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिएके लिए उचित जल निकास एवं बलुई दोमट मिट्टी आवश्यक होता है इसकी खेती के लिए 20 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान बहुत अच्छा होता है!
makka ki kheti ki jankari in hindi (makka ki vaigyanik kheti)
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खेती की तैयारी खाद एवं उर्वरक

जून के महीने में खेत की गहरी जुताई कर देनी चाहिए जिससे मिट्टी में छुपे कीड़े मकोड़े नष्ट हो जाए जब पहली बारिश होती है उसके बाद खेतों की अच्छी तरह से जुताई करने के बाद उसमे पाटा चला देना चाहिए जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए खेत की आखरी जुताई के समय 20 से 30 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद, 200 किलोग्राम नाइट्रोजन,80 किलो पोटाश, 80 किलो फास्फोरस एक हेक्टेयर खेत में मिला देना चाहिए नाइट्रोजन की आधी मात्रा खेत की तैयारी करते समय तथा शेष बची हुई मात्रा बुआई के डेढ़ महीने बाद उपयोग करना चाहिए

मक्का की खेती के लिए किस्मों का चयन 

सामान्य तौर पर मक्का की दो तरह की किश्में होती हैं संकर किस्में और देसी किश्में

(संकर किश्में ) -  इसके अंतर्गत सरताजपूसा अर्ली 1,पूसा अर्ली 2केयच-510गंगा 4गंगा 11 बहुत सी किसमें आती है !

(देशी किश्मे) -  इसके अंतर्गत  मोतीजवाहर-216आजादनवजोत,नर्मदा मोती,कंचन बहुत सी किसमें आती है !

बीजोपचार


बीजों की बुआई करने से पहले बीजोंपचार कर लेना चाहिए  बीजोंपचार करने से पौधों में रोग लगने की संभावना कम हो जाती है बीज उपचार करने के लिए 2 ग्राम प्रति kg बाविस्टीन का प्रयोग करना चाहिए !

बीज की बुआई

खेत तैयार होने के बाद बीजों की बुवाई मेड बनाकर 7 सेंटीमीटर की गहराई में मेड के दोनों तरफ करनी चाहिए इसके साथ-साथ बीजों की खेत में छिटकर पाटा चला देते हैं इस विधि से बुआई करने पर अधिक बीज की आवश्यकता होती है इसके अलावा कुदाल की सहायता से भी बीजों की बुवाई की जाती है! बुआई के 30 दिन बाद गुड़ाई करके मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए और यूरिया की बची हुई मात्रा को दे देना चाहिए और हल्की सिंचाई कर देना चाहिए

मक्का की फसल में खरपतवार नियंत्रण

मक्का की फसल में समय-समय पर खरपतवार को खेत से निकाल देना चाहिए बुआई करने के बाद लगभग 25 दिन बाद निराई गुड़ाई कर देनी चाहिए पानी की कमी होने पर हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए मक्का की फसल में खरपतवार रहने से पैदावार पर बहुत भारी असर पड़ता है !

 लगने वाले रोग और नियंत्रण

मक्का की फसल में आमतौर पर झुलसा - धब्बा रोगपाउडरी मिल्ड्यूतथा तना सड़न रोग पाया जाता है

धब्बा रोग के नियंत्रण के लिए 2 ग्राम प्रति लीटर daithen M45 प्रति लीटर या बाविस्टीन 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलकर छिड़काव करना चाहिए !

पाउडरी मिल्ड्यू रोग के नियंत्रण के लिए 2 ग्राम प्रति लीटर daithen M45 प्रति लीटर या castodiya 1.5 ml प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए !

तना सड़न रोग के नियंत्रण के लिए थिरम 2 ग्राम प्रति लीटर या केप्टान 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में उपयोग करना चाहिए !

मक्का की कटाई,मड़ाई

अच्छी तरह फसल पकने के बाद मक्का की तुड़ाई कर लेनी चाहिए तुड़ाई करने के बाद भुट्टों को धुप में सुखा लेना चाहिए और उसे पकने से पहले तोड़कर मंडियों में बाज़ार भाव रहने पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता हैउम्मीद करता हूं कि आप लोगों को यह जानकारी बहुत हेल्पफुल लगी होगी !
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