tamatar ki kheti ki jankari

  • टमाटर की खेती करने की नई जानकारी

    टमाटर की खेती के लिए आदर्श तापमान 

टमाटर की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए अच्छे तापमान का बहोत महत्त्व होता है ! इसकी फसल के लिए आदर्श तापमान 18-25 डिग्री सेंटीग्रेट होता है ! टमाटर की फसल में अधिक तापमान होने पर  फूल एवं फल टूटकर गिर जाते है ! और अधिक तापमान होने पर पौधे का विकास को लगभग रुक्जता है ! टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए  20-25 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा मन जाता है !
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टमाटर की खेती के लिए भूमि का चयन

टमाटर की फसल के लिए उचित जल निकास वाली बलुई दोमट मिटटी जिसमे जीवांश पर्याप्त मात्र में हो और उसका ph मान ५.0-७.0 हो टमाटर की खेती के लिए उपयुक्त मानी जनि जाती है !

टमाटर की खेती के लिए खेत की तैयारी खाद एवं उर्वरक  

टमाटर की फसल में खेत की तैयारी करते समय लगभग 20 टन गोबर की खाद और 120 kg नत्रजन, 60 kg फास्फोरस और 60 kg पोटाश प्रति एकड़ उर्वरक की आवश्यकता होती है नत्रजन की एक तिहाई पोटाश और फास्फोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले खेत में छिड़काव करके  अच्छी तरह जुताई कर देनी चाहिए ! और नत्रजन की बची हुई मात्र को दो बार में रोपाई के 30 दिन बाद व 65 दिन बाद नालियों में छिड़काव करके सिचाई कर देनी चाहिए ! टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए खेत की जाँच अवश्य करा लेनी चाहिए !

टमाटर की खेती के लिए उन्नत किस्म 

वैसे तो टमाटर की बहुत सी किस्मे है जो अलग-अलग जगह मौसम और जलवायु के आधार उपयोग किये जाते है !

(1) टमाटर की पुरानी किस्मे 

(a) पूसा गौरव,पूसा रूबी,अर्का विकाश,स्वर्णा नविन,कशी अमन,स्वर्णा लालिमा,पूसा शीतल अदि ये सब टमाटर की देशी किस्में है !
(b) पूसा हाइब्रिड 1,पूसा हाइब्रिड 2,काशी अभिमान,अविनाश,अर्काअभिजित अर्का वरदान,स्वर्णा वैभव,ऐसी बहुत सी किस्मे है जो की हाइब्रिड प्रजाति है !

उपर्युक्त टमाटर की किस्मे पुरानी है जो की गाँव के किसानो को नही मिल पता है कुछ किसान तो इनके नाम भी नहीं जानते है की टमाटर की ऐसी भी किस्में होती है !
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(2) टमाटर की नई किस्मे 

आज के ज़माने में तो हर किसान चाहता है की कितना अधिक से अधिक उपज प्राप्त करे जिससे अब संकर प्रजाति की किस्में हर किसान बहोत ख़ुशी से लगते है 

गाँव के किसान इस समय समय हयब्रिड किस्मे जैसे - आयुष्मान,नूजी विडू,अभिलाष,526,1313,प्रियंका,जैसी प्रजाति का उपयोग करते है !

टमाटर की खेती के लिए बीज की मात्र एवं बीज उपचार  

(1) देशी टमाटर एक हेक्टेयर खेत के लिए लगभग 300-450 ग्राम एवं संकर प्रजाति के लिए 150-250 ग्राम की मात्रा पर्याप्त मणि जाती है !
(2) टमाटर की नर्सरी डालने से पहले बाविस्टीन या थिरम से बीजोपचार कर लेना चाहिए ! बीजोपचार करने से बहोत से रोग नस्ट हो जरे है जिससे पैदावार में वृद्धि होती है !

टमाटर की खेती के लिए नर्सरी डालने का तरीका 

टमाटर की नर्सरी डालने से पहले उठी हुई 1.5 मीटर चौड़ा और 3 मीटर लम्बा 3या4  क्यारी  अपनी आवश्यकता अनुसार तैयार कर लेनी चाहिय और उसमे गोबर की सड़ी हुई खाद और 250 ग्राम प्रति क्यारी डालने के बाद गुड़ाई कर देनी चाहिए और उसे समतल बना लेनी चाहिए !

बीज को पंक्तियों में बीज से बीज की दुरी 1.5 सेंतिमेटर व लाइन से लाइन की दुरी 6 सेंतिमेटर के अन्तराल में बोनी चाहिए !

बीजों की बुवाई करने के बाद पुआल से ढक देना चाहिए और नमी नहीं होने पर फुवारे की सहायता से पानी का छिड़काव करना चाहिए बुवाई के एक सप्ताह बाद बीज निकलने लगते है इस स्थिति में पुआल हटा देनी चाहिए बुवाई से 25 से 30 दिन बाद पौधे रोपाई करने के लिए हो जाते है !

टमाटर की रोपाई

गर्मियों में टमाटर की रोपाई करने के लिए पेड़ से पेड़ की दुरी 1.0-1.5 फिट और कतार से कतार की दुरी 1.5-2.0 फिट और सर्दियों में पेड़ से पेड़ की दुरी 2.0-2.5 फिट तथा कतार से कतार की दुरी 1 मीटर रखनी चाहिए !

मौसम,जलवायु और स्थान के अनुसार इसकी दुरी में अंतर हो सकता है 

टमाटर की खेती में सिचाई

टमाटर मुख्य खेत में लगाने के बाद 4 से 7 दिन तक हजारे या किसी बर्तन की सहायता से देनी चाहिए  उसके बाद नालियों में दे !
गर्मियों में सिचाई 4-7 दिन के अन्दर तथा सर्दियों में सिचाई 10-15दिन के अंदर देनी चाहिए ! टमाटर में सिचाई आवश्यकतानुसार करनी चाहिए अधिक सिचाई करने से उकठा व वायरस जनित अनेक प्रकार के रोग लगते हैं ! जिससे उपज में कमी हो जाती है !

टमाटर के पौधों में मिटटी चढ़ाना 

टमाटर की रोपाई के 15-20 में फूल आने लगते हैं उस समय मिटटी चढ़ाना अत्यंत आवश्यक है !टमाटर के पौधों को सहारा देना बहुत जरुरी है खेत में नमी होने से और फल जमीन के संपर्क में आने से फल सड़ने लगते है ! टमाटर के पौधे को लकड़ी की या बांस की सहायता से रस्सी से बंधना चाहिए !

टमाटर की खेती में खरपतवार नियंत्रण 

टमाटर के खेत को खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए खरपतवार उगने लगे तो उसे कुदाल या खुरपी की सहायता से निकर देना चाहिए फसल में खरपतवार रहने से कीड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है ध्यान रहे की टमाटर में फुल आते समय निराई-गुड़ाई नही करनी चाहिए जिससे फुल झड़ने की संभावना होती है !

टमाटर की फसल  में लगने वाले रोग एवं उपचार 

(1)  हरा फुदका और सफ्हेद माखी -- इसके उपचार के लिए ACITAMIPRID 20% SP IMIDAKLOPRID का उपयोग 1ML/लीटर करना चाहिए !
(2) फली छेदक -- इसके उपचार के लिए 1.5ML/लीटर प्रोफेक्स,5ML/15 लीटर जम्बा या 1.5ML/लीटर बायो AK 57 का प्रयोग करना चाहिए !
(3) झुलसा रोग या आर्द्र गलन रोग -- यह रोग टमाटर के लिए बहोत खतरनाक होता है ! यह रोग लगने से अगर ध्यान नहीं दिया जाय तो पूरा खेत नस्ट हो जाता  है इसके उपचार के लिए 1.5ML/लीटर DAITHEN-M-45या 1ML/लीटर बाविस्टीन या 15ML/लीटर AMISTAR का प्रयोग करना चाहिए !
(4) फसल को मक्खियों से बचने के लिए प्रकाश प्रपंच का प्रयोग करना चाहिए !

टमाटर के फलों की तुड़ाई

अपनी सुविधा के अनुसार जब फल लाल होने लगे तुड़ाई करनी चाहिए तुड़ाई करने के बाद ख़राब फलों को निकाल देना चाहिए अपनी सुविधा के अनुसार अगर मंदी दूर है तो आधा कच्चे फल एवम् अगर मंदी नजदीक  है तो लाल हो जाने पर तोड़ना चाहिए !



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