राम जन्‍मभूमि-बाबरी अयोध्‍या मामले में CJI गोगोई ने तीन तीन जजों की बेंच के फैसले को पलट दिया

राम जन्‍मभूमि-बाबरी अयोध्‍या मामले में बाईट दिनों तीन जजों के बेंच के हुए फैसले को CJI गोगोई ने पलट दिया न्यायाधीश रंजन गोगोई के द्वारा राम जन्‍मभूमि-बाबरी मामले में उनके द्वारा किया गया फैसला बहुत ही चकाचौंध रहा  मुख्‍य न्‍यायाधीश के प्रशासनिक आदेश पर एक  एक संवैधानिक पीठ का गठन हुआ है इससे पहले सुप्रीमकोर्ट में ऐसा पहले कभी भी देखने को नहीं मिला था। 



राम जन्‍मभूमि-बाबरी अयोध्‍या
राम जन्‍मभूमि-बाबरी अयोध्‍या मामले में CJI गोगोई ने तीन तीन जजों की बेंच के फैसले को पलट दिया

जन्‍मभूमि-बाबरी मामले के इसी मामले में हुए तीन जजों के बेंच के आदेश को भी रद्द कर दिया गया है जस्टिस गोगोई द्वारा दिया गया यह आदेश बहुत ही अनूठा माना जा रहा है इसलिए संवैधानिक पीठ की मांग को खारिज किया गया था | 

08 जनवरी 2019 दिन मंगलवार की शाम को सुप्रीम कोर्ट रजिस्‍ट्री ने एक नोटिस जारी किया है जिसमें कहा गया है की राम जन्‍मभूमि-बाबरी मामले की सुनवाई 10 जनवरी 2019 दिन गुरुवार से तीन जजों की की जगह पांच जजों की संवैधानिक पीठ करेगी। 

इस पीठ में मुख्‍य न्‍यायाधीश गोगोई, उदय यू ललित, जस्टिस एस बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़ तथा एनवी रमना जैसे न्‍यायाधीश सम्मिलित होंगे। 

वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने एक नियम लागु किया था जिसके तहत किसी भी मुख्‍य न्‍यायाधीश के पास यह अधिकार होता है की वह किसी भी अपील या मामले की सुनवाई के लिए 2 या 2 से ज्यादा की बेंच कभी भी बना सकते हैं चूँकि यह सुप्रीम कोर्ट नियम लागु हुआ है इसलिए यही बात सुप्रीम कोर्ट के हैंडबुक में भी कहा गया है चीफ जस्टिस कभी भी किसी सुनवाई के लिए 2 से 5 या इससे भी ज्यादा जजों की बैंच बना सकते हैं।

प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई पहले ऐसे न्‍यायाधीश हैं जिन्होनें संवैधानिक पीठ की मांग को ठुकरा दिया है।


पिछले साल हए सितंबर में तीन जजों की बैंच ने अपने आदेश में यह कहा था कि राम जन्‍मभूमि-बाबरी मामले को किसी भी संवैधानिक पीठ को भेजे जाने की कोई जरूरत नहीं है हुए 2-1 के फैसले में यह साफ़ कहा गया था कि राम जन्‍मभूमि-बाबरी मामले को पूरी तरह से जमीन विवाद की तरह सुना जाएगा और इसका पालन होगा। 


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